आज की इस पोस्ट में, में आपको एक ऐसी स्टोरी बता रहा हु जो यकीनन आपको बहुत कुछ सिखा देगी ! कहते हे की अच्छी कहानियाँ हमारे अंदर अच्छे संस्कारो को जन्म देती हे ! शायद इसलिए हमारे दादा-दादी, नाना-नानी हमें कहानियाँ सुनाया करते थे ! पहली स्टोरी आपको एक अच्छे बेटे बनने का सबक देगी तो दूसरी कहानी जिंदगी को सही से जीने की सीख देगी !

Two Learning Story That Change Your Life

पहली स्टोरी - एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय
से आती थी और अपना काम पूर्ण मेहनत
तथा ईमानदारी से करती थी !
गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर के
भी खूब खुश थी क्यों कि उसके मालिक .......
जंगल के राजा शेर नें उसे दस बोरी अखरोट
देने का वादा कर रक्खा था !

गिलहरी काम करते करते थक जाती थी
तो सोचती थी कि थोडी आराम कर लूँ ....
वैसे ही उसे याद आता था :- कि शेर उसे
दस बोरी अखरोट देगा - गिलहरी फिर
काम पर लग जाती !
गिलहरी जब दूसरे गिलहरीयों को खेलते -
कुदते देखती थी तो उसकी भी ईच्छा होती
थी कि मैं भी enjoy करूँ !
पर उसे अखरोट याद आ जाता था !
और वो फिर काम पर लग जाती !

शेर कभी - कभी उसे दूसरे शेर के पास
भी काम करने के लिये भेज देता था !

ऐसा नहीं कि शेर उसे अखरोट नहीं देना
चाहता था , शेर बहुत ईमानदार था !

ऐसे ही समय बीतता रहा....

एक दिन ऐसा भी आया जब जंगल के
राजा शेर ने गिलहरी को दस बोरी अखरोट
दे कर आजाद कर दिया !

गिलहरी अखरोट के पास बैठ कर सोचने
लगी कि -अब अखरोट हमारे किस काम के ?
पुरी जिन्दगी काम करते - करते दाँत तो घिस
गये, इसे खाऊँगी कैसे !

यह कहानी आज जीवन की हकीकत बन चुकी है ! इन्सान अपनी ईच्छाओं का त्याग करता है, और पूरी जिन्दगी नौकरी में ,business में, धन कमाने में बिता देता है ! 60 वर्ष की ऊम्र में जब वो रिटायर्ड होता है तो उसे उसका जो फन्ड मिलता है या bank balance होता है उसे use करने की क्षमता खो चुका होता है तब तक जनरेशन बदल चुकी होती है,परिवार को चलाने वाले बच्चे आ जाते है।

क्या नये मुखिया को इस बात का अन्दाजा लग पायेगा की इस फन्ड के लिये : -
कितनी इच्छायें मरी होगी ?
कितनी तकलीफें मिली होगी ?
कितनें सपनें रहे होंगे ?
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क्या फायदा ऐसे फन्ड का जिसे
पाने के लिये पूरी जिन्दगी लगाई जाय
और उसका इस्तेमाल खुद न कर सके !

"इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके।
इसलिए हर पल को खुश होकर जियो , वयस्त रहो पर साथ में मस्त रहो सदा स्वस्थ रहो
Busy रहो !
पर Be + Easy रहो ।

कहते हे न की :-

बहुत कमाओ पर उसे इकटठा मत करो ! कही ऐसा ना हो की जब आप बीमार पड़ो तो आपके बच्चे डॉक्टर की जगह वकील को बुला लाये !


दूसरी स्टोरी  -एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए एक अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया....खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया....रेस्टॉरेंट में बैठे दुसरे खाना खा रहे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से
देख रहे थे, लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था ll खाने के बाद बिना किसी शर्म के बेटा, वृद्ध को वॉश रूम ले गया...उसके कपड़े साफ़ किये, उसका चेहरा साफ़ किया, उसके बालों में कंघी की, चश्मा पहनाया और फिर बाहर लाया....ll सभी लोग खामोशी से उन्हें ही देख रहे थे। बेटे ने बिल पे किया और वृद्ध के साथ बाहर जाने लगा...ll तभी डिनर कर रहे एक अन्य वृद्ध ने बेटे को आवाज दी और उससे पूछा " क्या तुम्हे नहीं लगता कि यहाँ अपने पीछे तुम कुछ छोड़ कर जा रहे हो ?? " बेटे ने जवाब दिया" नहीं सर, मैं कुछ भी छोड़ कर नहीं जा रहा। " वृद्ध ने कहा " बेटे, तुम यहाँ छोड़ कर जा रहे हो, प्रत्येक पुत्र के लिए एक शिक्षा (सबक) और प्रत्येक पिता के लिए
 उम्मीद (आशा)...दोस्तो आमतौर पर हम लोग अपने बुजुर्ग माता पिता को अपने साथ बाहर ले जाना पसँद नही करते....और कहते है क्या करोगे आप से चला तो जाता नही ठीक से खाया भी नही जाता ।। आप तो घर पर ही रहो वही अच्छा होगा. क्या आप भूल गये जब आप छोटे थे और आप के माता पिता आप को अपनी गोद मे उठा कर ले जाया करते थे ।।
आप जब ठीक से खा नही पाते थे तो माँ आपको अपने हाथ से खाना खिलाती थी और खाना गिर जाने पर डाँट नही प्यार जताती थी.....फिर वही माँ बाप बुढापे मे बोझ क्यो लगने लगते है??? माँ बाप भगवान का रूप होते है उनकी सेवा कीजिये और प्यार दीजिये...क्योकि एक दिन आप भी बुढे होगे फिर अपने बच्चो से सेवा की
उम्मीद मत करना.......

check que?.ans

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