दफ़्तर में देर रात तक काम करते हैं और बाद में भी चैन से सो नहीं पाते हैं? तो ज़रा सम्भल जाइए, क्योंकि यह जीवनशैली सेहत पर भारी पड़ सकती है

आठ घंटे की नींद आदर्श मानी जाती है। लेकिन जब अनियमित जीवनशैली के चलते शरीर की जैविक घड़ी बिगड़ती है, तो नींद ही नहीं शरीर की पूरी कार्यप्रणाली पर नकारात्मक असर पड़ता है। पर्याप्त नींद नहीं हो पाना, यानी कई स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा मिलना है। अाइए जानते हैं कि नींद की कमी क्या-क्या नुक़सान करती है और इस कमी की पूर्ति के लिए क्या करना चाहिए-

 समय से पहले झुर्रियां (wrinkles on face) रात में कम नींद होने पर शरीर में सीरम काॅर्टिसोल नामक तनाव हाॅर्मोन की मात्रा बढ़ जाती है। इसकी अधिकता से त्वचा का लचीलापन बरक़रार रखने वाला कोलेजन नामक प्रोटीन टूटने लगता है, जिससे झुर्रियां आने लगती हैं। त्वचा और आंखों में सूजन या उनके नीचे काले घेरे जैसे लक्षण भी उभरने लगते हैं।

 वज़न में बढ़ोतरी (weights increase metabolism) अधूरी नींद का सम्बंध वज़न बढ़ने से भी है, क्योंकि ऐसे में भूख काफ़ी बढ़ जाती है। एक शोध के अनुसार जो लोग छह या इससे कम घंटे सोते हैं, उनमें मोटापे की आशंका 30 फ़ीसदी अधिक होती है। ग्रेलिन नामक हाॅर्मोन भूख बढ़ाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक़ कम नींद होने पर ग्रेलिन की सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे भूख पर नियंत्रण नहीं रहता है। वहीं, मस्तिष्क के उस हिस्से की क्रियाशीलता कम हो जाती है, जो भूख की संतुष्टि का अहसास करवाता है।

 दिमाग़ की मुश्किल(brain and memory facts) नींद की कमी मस्तिष्क सम्बंधित विभिन्न कार्यप्रणालियों को बाधित करती है, जैसे एकाग्रचित्त होने, सोचने-समझने, सीखने, याद रखने और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता में कमी आना आदि। इतना ही नहीं, ऐसी स्थिति में व्यक्ति की स्मरणशक्ति स्थायी रूप से कमज़ोर होने लगती है।

 कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता(immunity impact factor)  शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बाहरी संक्रमण, यानी हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन अपर्याप्त नींद से इस क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे व्यक्ति के बीमार पड़ने और साइनोसाइटिस या अस्थमा जैसी एलर्जी से पीड़ित होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

 अवसाद का बड़ा कारण नींद पूरी नहीं होने पर मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ने लगता है। ऐसे में ख़राब मनोदशा, चिड़चिड़ापन या अिधक गु़स्सा आने जैसे व्यवहारगत परिवर्तन होते हैं, साथ ही पीड़ित तनावग्रस्त रहने लगता है। अगर नींद सम्बंधी अनियमितता लम्बे समय तक लगातार बनी रहे, तो तनाव, अवसाद में तब्दील हो सकता है। तभी तो शरीर को  benefits हे अच्छी नींद के 

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