महाकाल दर्शन की ऑनलाइन टिकट बुकिंग - Top.HowFN.com

महाकाल दर्शन की ऑनलाइन टिकट बुकिंग


भारत में विभिन्न स्थानों पर भगवान शिव के प्रमुख 12 शिवलिंग स्थापित हैं। इनकी महिमा का वर्णन अनेक धर्म ग्रंथों में लिखा है। बैसे तो इन सभी ज्योतिर्लिंगों का अपना अलग महत्व है लेकिन इन सभी में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का विशेष स्थान है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार-
आकाशे तारकेलिंगम्, पाताले हाटकेश्वरम् मृत्युलोके च महाकालम्, त्रयलिंगम् नमोस्तुते।। 
यानी आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग और पृथ्वी पर महाकालेश्वर से बढ़कर अन्य कोई ज्योतिर्लिंग नहीं है। इसलिए महाकालेश्वर को पृथ्वी का अधिपति भी माना जाता है अर्थात वे ही संपूर्ण पृथ्वी के एकमात्र राजा हैं।

Ujjain mp, baba mahakal मंदिर प्रशासन ने सिंहस्थ में 151 रुपए की दर्शन टिकट के लिए समिति की महाकाल, हरसिद्धि धर्मशाला सहित शहर व मेला क्षेत्र में कई जगह लोकल काउंटर खोलने के साथ वेबसाइट पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग सुविधा चालू रखने का निर्णय लिया है।

 प्रशासन सिंहस्थ की दर्शन व्यवस्था को एक तरह से फायनल कर चुका है। 151 रुपए की टिकट वाले श्रद्धालु पुलिस चौकी के पास भस्मारती गेट से प्रवेश करेंगे। हालांकि प्रशासन इन्हें प्रवचन हॉल गेट से भी प्रवेश देने पर विचार कर रहा है लेकिन दोनों में से किसी भी गेट से प्रवेश में 30 से 45 मिनट में दर्शन कराने की योजना है।
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 महाकाल दर्शन के लिए श्रद्धालु आम लोगों की लाइन में लगकर घंटों इंतजार नहीं करना चाहते हैं तो 151 रुपए देकर लोकल काउंटरों या वेबसाइट www.mahakaleshwar.nic.in पर ऑनलाइन बुकिंग से टिकट लेकर 30 से 45 मिनट में विशेष दर्शन कर सकेंगे। सिंहस्थ के लिए लोकल काउंटर पर हाथोंहाथ टिकट मिलेगी। वेबसाइट पर एक माह पहले तक क्रेडिट-डेबिट कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट कर एडवांस टिकट बुक कर सकते हैं।

सिंहस्थ में शाही स्नान के दिनों को छोड़कर आम लाइन के अलावा 151 रुपए की टिकट से विशेष सुविधा चालू रखेंगे। 151 की टिकट लोकल काउंटरों सहित वेबसाइट पर ऑनलाइन भी बुक कर सकेंगे। आरपी तिवारी, मंदिर प्रशासक

अकाल मृत्यु से बचाते हैं महाकाल - भगवान महाकालेश्वर के संबंध में विभिन्न धर्म ग्रंथों में उल्लेख है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से अकाल मृत्यु से मुक्ति व मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। काल का अर्थ है मृत्यु और जो महाकाल यानी मृत्यु के स्वामी का भक्त हो उसे अकाल मृत्यु से कैसा भय। इसलिए भगवान महाकालेश्वर के संबंध में यह भी प्रचलित है- अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का काल उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का

भस्मारती का विशेष महत्व - संपूर्ण विश्व में महाकालेश्वर ही एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहां भगवान शिव की भस्मारती की जाती है। भस्मारती को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं। 

मान्यता है कि प्राचीन काल में मुर्दे की भस्म से भगवान महाकालेश्वर की भस्मारती की जाती थी लेकिन कालांतर में यह प्रथा समाप्त हो गई और वर्तमान में गाय के गोबर से बने उपलों(कंडों) की भस्म से महाकाल की भस्मारती की जाती है। यह आरती सूर्योदय से पूर्व सुबह 4 बजे की जाती है। जिसमें भगवान को स्नान के बाद भस्म चढ़ाई जाती है।

पृथ्वी का केंद्र हैं महाकाल - कुछ विद्वानों का यह भी मत है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग ही संपूर्ण पृथ्वी का केंद्र बिंदु है और संपूर्ण पृथ्वी के राजा भगवान महाकाल यहीं से पृथ्वी का भरण-पोषण करते हैं।

एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग  

महाकालेश्वर उज्जैन की एक और खास बात यह भी है कि सभी प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र महाकालेश्वर ही दक्षिणमुखी हैं अर्थात इनकी मुख दक्षिण की ओर है। धर्म शास्त्रों के अनुसार दक्षिण दिशा के स्वामी स्वयं भगवान यमराज हैं। इसलिए यह भी मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से भगवान महाकालेश्वर के दर्शन व पूजन करता है उसे मृत्यु उपरांत यमराज द्वारा दी जाने वाली यातनाओं से मुक्ति मिल जाती है।

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हर मन्नत होती है पूरी

धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जो थोड़े जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी कर देते हैं। उसी प्रकार जो भी भक्त महाकालेश्वर के दर्शन कर अपनी मनोकामना करता है, उसकी मनोकामना जरुर पूरी होती है।

 ऐसी जनश्रुति है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही धन, धान्य, निरोगी शरीर, लंबी आयु, संतान आदि सबकुछ अपने आप ही प्राप्त हो जाता है।

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