आज बस में मैने एक सुंदर महिला को देखा और ईश्वर से प्रार्थना की कि में उसकी तरह सुंदर हो जाऊ. जब वह सुंदरी जाने को हुई तो मैने देखा की उसका एक पैर नही था और वह बैसाखी के सहारे चल रही थी. जाते समय वह मुस्कुराई. मैं कुछ देर तक स्तब्ध सोचती रही, हे ईश्वर मुझे मेरी प्रार्थना के लिए माफ़ कर देना, आपने मुझे दो पैर दिए हैं, ऐसा लग रहा है मानो पूरा संसार मेरा है.
इसी उधेड़बुन में कुछ दूर ही चली थी की दुकान दिखाई दी, जहा एक लड़का बड़े ही उत्साह से टॉफियां बेच रहा था. मैं टॉफी खरीदने के लिए रुकी. मुझे कही जाने की जल्दी नही थी तो मैने आराम से उससे बात की. मेरी बातचीत से वह बहुत खुश हो गया. जब मैं जाने के लिए मुड़ी तो उसने कहा, 'धन्यवाद आप बहुत दयालु हैं, आप जैसे लोगो से बात करके बहुत ख़ुशी होती है, आप देख ही रही हैं कि में नेत्रहीन हु. 'मैं समझ नही पाई की मैं क्या जवाब दू इस बात का. किसी तरह से खुद को शांत किया और वहां से निकली. मैंने ईशवर को दो आँखे देने के लिए धन्यवाद दिया.

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में सड़क पर चल रही थी की मैंने एक बच्चे को देखा, जिसे मैं जानती थी. वह वहा पर खड़ा होकर सामने खेल रहे बच्चो को देख रहा था. वह समझ नही पा रहा था की वह क्या करे. मैं एक मिनट के लिए रुकी, फिर उससे कहा, 'तुम उसके साथ खेलते क्यों नही', वह बिना कुछ कहे सामने देखता रहा. मै भूल गई थी की वह बच्चा सुन नही सकता. हे ईश्वर मुझे क्षमा करना, में बहुत खुशकिस्मत हु जो मेरे पास दो कान भी हैं.

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