मंगलवार की रत सबसे बड़ा चोंकाने वाला फैसला आया. पूरा देश चोंक गया. अमीरों के पसीने छुटने लग गए तो गरीब खुश हो गए. लेकिन सवाल आता हे की इस Proposal के पीछे किस इंसान का हाथ हे. हर निर्णय और नीति के पीछे किसी ना किसी का खुराफाती दिमाग होता हे.

इसके पीछे “अर्थक्रांति संस्थान“ का हाथ हे. यह पुणे की इकोनोमिक एडवाइजरी संस्था हे. संस्थान के एक मेम्बर अनिल बोकिल ने मोदीजी से कुछ महीने पहले एक मीटिंग की थी जिसमे उन्हें 9 मिनट का टाइम दिया गया था. लेकिन जब बोकिल ने बड़े नोट बंद करने का प्रपोजल दिया तो मोदी को Intrest आया और मीटिंग 2 घंटे तक चली.

बोकिल की टीम पहले राहुल गाँधी से भी मिल चुकी हे. तब उन्हें सिर्फ 10 सेकंड का टाइम दिया गया था. यह भी पढ़े एक कहानी जो यह बताती हे की मौत को कोई नहीं रोक सकता

500-1000 के नोट वापिस लेने से क्या फायदा होगा

1. Cash ट्रांजेक्शन से होने वाला भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा. लोगों की Black Money या तो White हो जाएगी या बेकार. लोगों के पास इकट्ठा नोट कागज़ के टुकड़े रह जाएंगे.

2. मार्केट में Black Money खत्म होने से Property इत्यादि की कीमतों पर लगाम लग जाएगी.

3. सुपारी लेकर किये जाने वाले Crime अपने आप बंद हो जाएंगे और Cash ट्रांजेक्शन के ज़रिये आतंकवाद की फंडिंग पर भी रोक लगेगी.

4. जाली नोटों का चलन भी ऐसे में बंद हो जाएगा और महंगी Property खरीदने के बाद रजिस्ट्री में हेर-फेर नहीं हो पायेगा.

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