तन-मन की शुद्धि, धुन व रिश्तों में वृद्धि ओर रूप से विचारों तक अच्छे बदलाव की कामना से मनाए पर्व. आईये जानते हे दिवाली के 5 दिनों के बारे में. 


पहला दिन : स्वास्थ्य
'शरीरमाघ खलु धर्मसाधनम'-सभी कर्तव्यों के पालन का प्रथम साधन शरीर ही है. तब ही धन का महत्व है. इसलिए स्वस्थ शरीर के लिए व्यायाम करे ओर अधिक से अधिक सक्रिय रहे. धनतेरस को धन्वन्तरि-पूजन का यही महत्वपूर्ण संदेश है.

दूसरा दिन : रूप
रूपगोस्वामी के दिन शरीर की साफ़-सफ़ाई का महत्व है. ऊबटन, तेल, तिल लगातार शरीर को दमकता हुआ बनाते हैं. जब ख़ुद में अच्छा महसूस करेंगे, तब ही अच्छे प्रयत्न कर पाएँगे. पर सिर्फ़ बाहरी खबूसरती ही नही, मन व आत्मा के रूप को निखारने का भी यही वक़्त है.

तीसरा दिन : धन

दिवाली का दिन लक्ष्मी के स्वागत का दिन है. चारों ओर प्रकाश फेलाक़र सकारात्मकता के साथ महालक्ष्मी से समृद्धि ओर संपन्नता मांगते है. यह दिन धन के स्वागत के लिए जीवन प्रबंधन की प्रेरणा देता है. आय बढ़ाने के साथ बचत, निवेश, यानी पूर्ण प्रबंधन भी ज़रूरी है.

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चोथा दिन : आहार
अन्नकूट में कई साग ओर अनाज से भोग तेयार करते है. इसी तरह रोज़ के भोजन में सात्विकता होगी, तो वह स्वादिष्ठ के साथ पोषक ओर स्वास्थ्यवर्धक भी होगा. सच है- अच्छा भोजन स्वयं दवा है, क्योंकि इससे आपको दवा की ज़रूरत ही नही पड़ेगी.

पाँचवा दिन : रिश्ते-नाते
सच्चे रिश्तों में तकरार के साथ प्यार, तर्क-वितर्क़ के साथ फ़ेलने का सम्मान ओर विश्वास होता है. भाईदूज जीवनभर रिश्ते निभाने को प्रेरित करता हैं.

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