मानसून के मोसम में उपर से बरसता हुआ पानी सबको अच्छा लगता हे. लेकिन यह दिल को भा जाने वाला मोसम अपने साथ कई बिमारियों को भी लाता हे. इसी मानसून में होने वाली समस्याओं में से एक समस्या हे गैस्ट्रोएंटराइसिस. बारिश के मोसम में गंदगी ज्यादा बड जाती हे और ऐसे मोसम में बेक्टीरिया भी ज्यादा होते हे और खराब पानी या भोजन के सेवन से गैस्ट्रोएंटराइसिस होने का खतरा भी ज्यादा रहता हे.

क्या होता हे गैस्ट्रोएंटराइसिस??
गैस्ट्रोएंटराइसिस आमतोर पर बेक्टीरिया और वायरस का संक्रमण हे. गैस्ट्रोएंटराइसिस ऐसे भोजन और पानी से होता हे जो ई.कोलाई, साल्मोनेला, नोरो वायरस, रोटा वायरस आदि से संक्रमित होता हे.

गैस्ट्रोएंटराइसिस के लक्षण
1. पेट में दर्द होना और मरोड़े आना.

2. उलटी और दस्त लगना.

3. गंभीर डायरिया.

4. भुखार और कमजोरी

5. मुहं सुखना.

किन लोगो को रहता हे खतरा अधिक
छोटे बच्चो में इसका खतरा अधिक रहता हे क्योकि उनका इम्यून तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता हे. उम्र के साथ-साथ बुजुर्गों में भी बिमारियों से लड़ने की ताकत कम रह जाती हे तो उन्हें भी इस रोग के होने का खतरा रहता हे.

गैस्ट्रोएंटराइसिस से बचाव के तरीके

1. उबला हुआ पानी पियें.

2. गंदे स्थानों पर खाना खाने से बचे.

3. फलों और सलादों को पहले काटकर, फिर धोये उसके बाद खाए.

4. अपने जूतों के घर के बाहर उतारे ताकि रोगाणु घर के अंदर ना आये.

5. बारिश में भीगने के बाद साफ़ पानी से नहाना चाहिए.

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