तमिलनाडु कर्नाटक और केरल के जंगल में आतंक का पर्याय रहा डकैत वीरप्पन एक समय ऐसा था कि वीरप्पन के नाम से पुलिस से लेकर आम आदमी तक खौफ खाता था वीरप्पन के गिरोह में कुल 40 लोग थे जो उसके इशारे पर जान तक देने को तैयार थे. वीरप्पन पुलिस वालों को शिकार बनाता था. उसके अनुसार पुलिस ने ही उसके भाई-बहन को मारा है और वह इन पुलिसवालों को मारकर अपना बदला पूरा कर रहा है पुलिस के 184 लोगो की हत्या का जिम्मेदार veerappan था, आये जानते है कुछ विशेष जानकारी इस डकैत के बारे में -
वीरप्पन कई पक्षियों की आवाज निकाल लेता था।
वीरप्पन का जन्म 18 जनवरी 1952 को हुआ था Gopinatham village in Tamilnadu
  • - 18 वर्ष की उम्र में वह अवैध रूप से शिकार करने वाले गिरोह का सदस्य बन गया। 
  • - कुछ सालों में ही वह जंगल का बादशाह बन गया। उसने चंदन तथा हाथीदांत से पैसा कमाया। 
  • - कहा जाता है कि उसने तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के जंगल में कुल 900 से ज्यादा हाथियों को मार डाला।
  • -रिपोर्ट्स की माने तो वीरप्पन ने 10 साल की उम्र में हाथी का शिकार किया था, जबकि पहला मर्डर महज 17 साल की उम्र में
  • वीरप्पन को पकड़ने में सरकार ने कुल 20 करोड़ रुपये (हर वर्ष 2 करोड़) खर्च किए.
पुलिस व सरकार से ऐसे हुई दुश्मनी (veerappan biography in hindi)

- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले वीरप्पन केवल चंदन और हाथियों के दांतों की सप्लाई करता था।
- लेकिन उसकी दुश्मनी पुलिस और सरकार से तब हुई जब उसके भाई और बहन की हत्या हो गई थी।
- कहते हैं कि बहन और भाई की हत्या के बाद उसने इसके लिए पुलिस जिम्मेदार मान लिया।
- यही कारण है कि वह पुलिस और अधिकारियों का अपरहण और हत्या करने लगा।
- बताया जाता है कि वीरप्पन 184 पुलिस और फ़ॉरेस्ट अफसरों की हत्या का जिम्मेदार था।
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीरप्पन कला-प्रेमी था। उसने अंग्रेजी फिल्म द गॉडफादर लगभग 100 बार देखी थी। उसे कर्नाटक संगीत भी काफी प्रिय था (यहाँ क्लिक कर जाने आरुषि हत्याकांड क्यों उठे मीडिया और सीबीआई जांच पर सवाल Aarushi Talwar Delhi)
- वीरप्पन प्रसिद्ध व्यक्तियों की हत्या तथा अपहरण के बल पर अपनी मांग रखने के लिए भी कुख्यात था। 1987 में उसने एक वन्य अधिकारी की हत्या कर दी। 10 नवम्बर 1991 को उसने एक आई.एफ.एस ऑफिसर पी श्रीनिवास को अपने चंगुल में फंसा कर उसकी निर्मम हत्या कर दी। इसके अतिरिक्त 14 अगस्त 1992 को मीन्यन के पास हरिकृष्ण (आईपीएस) तथा शकील अहमद नामक दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों समेत कई पुलिसकर्मियों की हत्या तब कर दी जब वे एक छापा डालने जा रहे थे

कर्नाटक सरकार ने 1990 में वीरप्पन को पकड़ने के लिए विशेष पुलिस दस्ते का गठन किया। पुलिसवालों ने उसके कई आदमियों को पकड़ लिया। 1993 में पुलिस ने उसकी पत्नी मुत्थुलक्ष्मी को गिरफ्तार कर लिया। कहा जाता है कि बेटे के रोने तथा चिल्लाने के कारण पुलिस की पकड़ में ना आए इसके लिए गला घोंट कर मार दिया

वीरप्पन की अपने गांव गोपीनाथम में रॉबिन हुड की तरह छवि थी। गांववाले छत्र की तरह काम करते थे। उसे पुलिस की गतिविधियों के बारे में सूचनाएं दिया करते थे। उसकी हर तरह की मदद किया करते थे वीरप्पन कई पक्षियों की आवाज निकाल लेता था। उसे संगीत काफी प्रिय था। उसे अपनी लम्बी घनी मूंछे बहुत पसन्द थीं । वह मां काली का बहुत भक्त था। कहा जाता है कि उसने एक काली मंदिर भी बनवाया था

कन्नड़ स्टार को किया था किडनैप...

कन्नड़ फिल्म एक्टर राजकुमार को वीरप्पन ने उनके तमिलनाडु के गजनौर स्थित फार्महाउस से किडनैप कर लिया था। 30 जुलाई 2000 को हुई इस वारदात के बाद तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार के बीच टेंशन बढ़ गया। हालांकि, सरकार द्वारा मांगे मानने के बाद ठीक 104 दिन में राजकुमार को वीरप्पन ने छोड़ दिया थाencounter death video

कहते हैं कि डकैत वीरप्पन खूंखार होने के साथ-साथ तेज दिमाग भी था। यही वजह थी कि उसे पकड़ने के लिए तीन राज्यों की पुलिस और आर्मी को 30 दशक से ज्यादा लगे थे। 18 अक्टूबर 2004, को वीरप्पन का उसके दो साथियों के साथ तमिलनाडु के धरमपुरी जिले में आने वाले पपरापत्ति जंगल में एनकाउंटर हो गया था। जानिए कैसे फंसा वीरप्पन पुलिस के जाल में...

- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीरप्पन के एनकाउंटर की सबसे बड़ी वजह मोतियाबिंद था।
- दरअसल, वीरप्पन को मोतियाबिंद हो गया था और इलाज के लिए दो साथियों के साथ पपरापत्ति के जंगल से बाहर निकला था।
- इस बीच वीरप्पन को पकड़ने के लिए ऑपरेशन चला रही तमिलनाडु एसटीएफ को इसकी खुफिया जानकारी मिली।
- एसटीएफ ने एक नकली एम्बुलेंस जंगल में भेजी जिस पर सलेम हॉस्पिटल लिखा था।
- पुलिस को धोखा देने के लिए वीरप्पन ने अपनी मूंछे ट्रिम कर ली और साथियों के साथ एम्बुलेंस में सवार हो गया।

ऐसे हुआ था एनकाउंटर...
- एसटीएफ ने वीरप्पन के हॉस्पिटल जाने वाले रास्ते में एक ट्रक खड़ा जिसमें हथियारों से लैस 22 एसटीएफ जवान मौजूद थे।
- एम्बुलेंस के ट्रक के पास आते ही एसटीएफ ने उसे हाथ देकर रोका और माइक पर वीरप्पन को सरेंडर करने कहा गया।
- दूसरी बार सरेंडर करने का अनाउंसमेंट होते ही एम्बुलेंस चला रहा एसटीएफ का अंडरकवर जवान गाड़ी से नीचे उतर गया।
- इसके बाद वीरप्पन और उसके साथियों ने एम्बुलेंस के अंदर से ही फायरिंग शुरू कर दी।
- मौका पाते ही एसटीएफ ने एम्बुलेंस के अंदर ग्रेनेड फेंका और जवानों ने गोलियां दागनी शुरू कर दी
उसके मरने पर भी कई तरह के विवाद हैं. उसका प्रशिक्षित कुत्ता और बंदर उसके मरने के बाद सामने आए. उसका कुत्ता मथाई कई मामलों में गवाह की भूमिका निभा रहा है. वह भौंक कर अपनी भावना व्यक्त करता है

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