WhatsApp group admin rules -अभी तक आपने Bike ड्राइव करने या फिर कोई शॉप खोलने के लिए लाइसेंस लेने की बात तो जरूर सुनी होगी, लेकिन व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के लिए लाइसेंस (licence requirements) लेने की बात चौंकाती है. लेकिन यह सच है कि अगर आप कोई व्हाट्सएप ग्रुप बनाने जा रहे हैं तो पहले आपको लाइसेंस लेना होगा.

केंद्र सरकार ने लाइसेंस लेने के लिए अपनी मंशा साफ कर दी है और इसके लिए बकायदा सर्कुलर भी जारी कर दिया है. भारत में व्हाट्सएप इस्तेमाल करने वालों की तादाद करोड़ों में हैं और सरकार के फैसले की जद में वे भी आएंगे
 ग्रुप का एडमिन ही सभी कंटेंट और पोस्ट के लिए जिम्मेदार होगा. इस ग्रुप में किसी भी आपत्तिजनक पोस्ट को भेजने पर उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. लाइसेंस अनिवार्य करने के पीछे सरकार ने जो जोरदार तर्क दिए, वह किसी को भी हैरान कर सकते हैं.
नए नियमों के तहत, व्हाट्सएप ग्रुप बनाते वक्त एडमिन को लाइसेंस के लिए सरकारी अधिकारी के सामने आवेदन करना होगा. दस दिनों के अंदर जांच के बाद व्हाट्सएप ग्रुप का लाइसेंस दिया जाएगा ग्रुप का एडमिन ही सभी कंटेंट और पोस्ट के लिए जिम्मेदार होगा.

इस ग्रुप में किसी भी आपत्तिजनक पोस्ट को भेजने पर उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. लाइसेंस अनिवार्य करने के पीछे सरकार ने जो जोरदार तर्क दिए, वह किसी को भी हैरान कर सकते हैं. लाइसेंस लेने का यह नियम फिलहाल जम्मू कश्मीर में लागू किया गया है. यह नियम J&K  में सफल होने के बाद सभी राज्यो के अधिकारी को नियम भी आ सकते है ऐसा फैसला लेने के पीछे एक कारण ये भी यहाँ क्लिक कर पढ़े

दरअसल, घाटी में इन दिनों हिंसा के बढ़ते मामलों ने सरकार के कान खड़े कर दिए हैं. ऐसे में किसी भी अफवाह को रोकने और उससे बचने के लिए जम्मू-कश्मीर में व्‍हाट्सएप ग्रुप बनाने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है. संबंधित ग्रुप पर कोई भी आपत्तिजनक कंटेट भेजने पर एडमिन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
 व्हाट्सएप के जरिए अफवाहों को हवा देकर घाटी में युवाओं को हिंसा के लिए उकसाया जा रहा है और ऐसे में सरकार ने यह कदम उठाने का फैसला किया है. पहले ही कश्मीर में मोबाइल और इंटरनेट सेवा पर पाबंदी लगाई जा चुकी है. केवल हंदवाड़ा में ही हिंसक झड़पों में पांच लोगों की जान जा चुकी है. कश्मीर डिवीजन के कमिश्‍नर डॉ. असगर हसन सैमून ने इससे संबंधित सर्कुलर जारी कर दिया है.
व्हाट्सएप के जरिए अफवाहों को हवा देकर घाटी में युवाओं को हिंसा के लिए उकसाया जा रहा है और ऐसे में सरकार ने यह कदम उठाने का फैसला किया है. पहले ही कश्मीर में मोबाइल और इंटरनेट सेवा पर पाबंदी लगाई जा चुकी है. केवल हंदवाड़ा में ही हिंसक झड़पों में पांच लोगों की जान जा चुकी है. कश्मीर डिवीजन के कमिश्‍नर डॉ. असगर हसन सैमून ने इससे संबंधित सर्कुलर जारी कर दिया है.

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