जीवन में 3 चीजे बड़ी मुश्किल से मिलती हे- अच्छी पत्नी, अच्छी सन्तान और अच्छा मित्र, पत्नी के चयन में माता-पिता की भूमिका होती हे और सन्तान की उत्पति में प्रकृति की ! लेकिन मित्र (friend) अपना खुद का चयन हे जेसे हम होते हे हमें friend भी वेसे ही मिलते हे, अगर हम अच्छे हे तो हमारा दोस्त भी अच्छा होगा और अगर हम बुरे हे तो हमारा दोस्त भी बुरा ही होगा, कहते हे न की जेसा बीज बोओगे वेसा ही फल मिलेगा ! यदि दोस्त गलत हे तो यह तुम्हारे selection की गलती हे !
जीवन में अच्छा दोस्त मिलना किस्मत की बात हे ! अच्छा मित्र पाने के लिए खुद का अच्छा होना भी जरुरी हे ! हमारे कई दोस्त हो सकते हे लेकिन सच्चे friend तो 1-2 ही होते हे ! लेकिन जिसके बहुत से मित्र हे सच में उसका एक भी मित्र नहीं हे ! कहते हे न की “सात मामों का भानेज भूखा ही रहता हे” एक सच्चा और अच्छा मित्र होना बहुत जरुरी हे जिस से हम हर बात share कर सकते हे, अपना दुःख-सुख बाँट सकते हे, मुसीबत में एक-दुसरे का हाथ बंटा सकते हे ! तुम किसी की हां में हां मिलाओ और कोई तुम्हारी हां में हां मिलाये इसे चापलूसी कहते हे लेकिन एक अच्छा और सच्चा मित्र तो आपकी गलतियों को आपको बताता हे use सुधरने का रास्ता भी बताता हे ! मुसीबत के समय ही 4 चीजो को परखा जाता हे धेर्य, धर्म, मित्र और पत्नी ! मित्र जितना पुराना होता हे उतना ही अच्छा रहता हे कहते हे न की “Old Is Gold” जिंदगी में बहुत से मित्र आते हे और जाते हे लेकिन हमारा पुराना मित्र ही साथ निभाता हे ! चाणक्य कहते हे की मित्र का ना होना जितना कष्ट नहीं देता हे उस से ज्यादा कुमित्र का होता दुःख देता हे ! मित्र बनाओ तो ऐसे बनाओ जेसे पानी में मछली रहती हे ! खाओ और निभाओ एक सच्ची दोस्ती की यही पहचान हे ! आखिर में ...

Best Friend Is not a lable it is a promise …

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