वीर्य या शुक्र कैसे बनता हे क्या seman meaning hindi

30 January 2016

वीर्य या शुक्र कैसे बनता हे क्या seman meaning hindi

  HOWFN       30 January 2016
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वीर्य Semen - एक भूरा सफेद शारीरिक तरल पदार्थ पुरुष और जानवरों की जननग्रन्थि द्वारा स्रावित जैविक चिपचिपा, फ्रक्टोज युक्त तरल पदार्थ होता है, जो एक नये जीव को उत्पन्न कर सकता है। वीर्य शरीर की बहुत ही मूल्यवान धातु है
वीर्य का सफेद रंग एंजाइमों, साइट्रिक एसिड, लिपिड, और एसिड फॉस्फेट युक्त प्रोस्टेट ग्रंथियों से स्राव के कारण है। बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि का उत्पादन। यह योनि और गर्भाशय ग्रीवा में शुक्राणु कोशिकाओं की गतिशीलता में मदद करता है

आयुर्वेद के अनुसार श्री सुश्रुताचार्य ने लिखा हैः
रसाद्रक्तं ततो मांसं मांसान्मेदः प्रजायते।
मदेसोSस्थि ततो मज्जा मज्जायाः शुक्रसम्भ्वः।। (सुश्रुत)
अर्थात – मनुष्य जो कुछ भोजन करता है वह पहले पेट में जा कर पचने लगता है, फिर उस का रस बनता है, उस रस का पाँच दिन तक पाचन हो कर उस से रक्त पैदा होता है। रक्त का भी पाँच दिन पाचन हो कर उस से माँस बनता है और इसी प्रकार पाँच पाँच दिन पश्चात माँस से मेद, मेद से हड्डी, हड्डी से मज्जा, तथा अंत में मज्जा से सप्तम सार वीर्य बनता है।

यही वीर्य फिर ओजस् रूप में सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त हो कर चमकता रहता है। स्त्री के इसी सप्तम सार पदार्थ को रज कहते हैं। वीर्य काँच की तरह चिकना और सफेद होता है और रज लाख की तरह लाल होता है। इस प्रकार रस से ले कर वीर्य और रज तक छः धातुओं के पाचन करने में पाँच दिन के हिसाब से पूरे तीस दिन तथा लग भग चार घंटे लगते हैं।
वैज्ञानिकों के मतानुसार चालीस सेर भोजन में से एक सेर रक्त बनता है और एक सेर रक्त से दो तोला वीर्य बनता है। इसी कारण से स्वास्थ रक्षा हेतु भारतीय विचारों में ब्रह्मचर्य पालन पर सर्वाधिक अधिक महत्व दिया जाता है।

वीर्य में शामिल हैं:
  1.  फ्रुक्टोज
  2. एस्कॉर्बिक एसिड 
  3. जस्ता 
  4. कोलेस्ट्रॉल 
  5. प्रोटीन 
  6. कैल्शियम 
  7. क्लोरीन 
  8. रक्त समूह प्रतिजन 
  9. साइट्रिक एसिड 
  10. डीएनए 
  11. मैग्नीशियम 
  12. विटामिन बी 12 
  13. फास्फोरस 
  14. सोडियम 
  15. पोटैशियम 
  16. यूरिक अम्ल 
  17. दुग्धाम्ल 
  18. नाइट्रोजन 
अन्य पोषक तत्व,,,,
वीर्य का निकलना ejaculation 
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित होता है। जिसे डॉक्टरी भाषा में CNS (central nervous system) कहते हे दिमाग और रीड की हड्डी (brain and the spinal cord) आते हे। मतलब वीर्य निकास के लिए या वीर्य बनने के लिए बॉस दिमाग की भागेदारी बहुत जरुरी हे तभी अच्छी मात्रा में शुक्राणु बनेगे शुक्राणु की संख्या, गुणवत्ता, गतिशीलता की कमी एवं संक्रमण, एंटीबॉडीस्‌ का विशेषज्ञों द्वारा नियमित उपचार काफी हद तक इन कमियों को दूर कर सकता है।
दूसरी बात खान-पान, योग, संयमित एवं नशारहित जीवन एवं सेक्स का पूर्ण ज्ञान संतानोत्पत्ति के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हुआ है। तनावपूर्ण जीवन, शराब, सिगरेट, ड्रग्स, अत्यधिक मोबाइल, कम्प्यूटर, लेपटॉप का उपयोग, शुक्राणुओं की संख्या एवं गुणवत्ता संतानहीनता के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। इसके कारण पुरुष संतानहीनता में निरंतर वृद्धि हो रही है।
सभी प्रयासों एवं कृत्रिम गर्भाधान की तकनीकों को अपनाकर अगर आप पिता बनने में सक्षम नहीं हैं और आप कृत्रिम गर्भाधान की आधुनिकतम तकनीक के लिए भी उपयुक्त नहीं हैं तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है। पुरुष संतानहीनता के क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान कई तरह के सफल समाधान प्रस्तुत करता है
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