सेक्स संबंधी बीमारियां स्त्री पुरषों में ओर समाधान problem and solution in ayurveda in hindi - Top.HowFN

सेक्स संबंधी बीमारियां स्त्री पुरषों में ओर समाधान problem and solution in ayurveda in hindi

महावारी शुरू होने के बाद लड़कियों में हार्मांस के बदलाव के कारण लगातार शारीरिक रूप से कुछ न कुछ परिवर्तन आते रहते है। ये समस्याएं उस समय और बढ़ जाती हैं, जब महिलाएं सेक्स करती हैं

या फिर सेक्स करने से पहले गर्भधारण से बचने के लिये गर्भ निरोधक गोलियों को नियमित तौर पर सेवन करती है महिलाओं में पुरूषों के मुकाबले, सामान्य सेक्स समस्याएं अधिक होती है।

कुछ स्थितियों में सेक्स के तत्कारल बाद सेक्स समस्याएं होने लगती हैं तो कभी संभोग के दौरान। इन समस्याओं से बचने के लिए महिलाओं को सेक्स‍ के सामान्य तरीके अपनाने चाहिए। आइए जानें महिलाओं में सामान्य सेक्स समस्या‍ओं के बारे में।

सेक्स के प्रति विमुख होना

स्त्रियों को सबसे अधिक शिकायत यौनेच्छा की कमी होती है। कई महिलाओं की सेक्स करने में बिल्कुल भी रूचि नहीं होती, यानी उनकी सेक्स भावना बिल्कुल खत्म हो चुकी होती है जो कि एक गंभीर सेक्स समस्या है

कई बार ये स्थिति मेनोपोज के बाद आती है तो कई महिलाओं में मेनोपोज से पहले ही महिलाओं मे सेक्स के प्रति अनिच्छा हो जाती है। हालांकि महिलाओं के मामले में अच्छे स्वास्थ्य की महिला का सेक्स जीवन खराब स्वास्थ्य वाली महिला की तुलना में सिर्फ़ 3-4 साल ही बढता है।

ल्यूकोरिया की समस्या

 योनि से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होना आज युवावस्था की महिलाओं के लिए भी आम समस्या हो गई है। सामान्य भाषा में इसे सफेद पानी यानी ल्यूकोरिया कहा जाता है 

योनि में खुजली-कई कारणों से महिलाओं को योनि में खुजली होने लगती है। इसके कई कारण जैसे इन्फेक्शन होना,ठीक से सफाई न होना, फिरंग, रोजाना कब्ज रहना और संभोग करने वाले व्येक्ति के यौनांगों में इन्फेक्शन होना,रक्त विकार इत्यादि इसके प्रमुख कारण हैं। 

गर्भशय संबंधी बीमारियां


कई बार प्यूबिक हेयर्स की ठीक से सफाई न करने के कारण उनमें स्थिति कीटाणु योनि मार्ग में प्रविष्ट होकर कई योनि गर्भाशय संबंधी समस्याओं को उत्पन्न कर सकते हैं। यौनांगों की इसीलिए ठीक तरह से सफाई होना बेहद आवश्यक है। 

अज्ञानता के कारण


 कई बार महिलाएं सेक्स संबंधी समस्याओं के बारे में डॉक्टर्स से खुलकर बात नहीं कर पाती जिससे उनकी बीमारियां बढ़ती जाती हैं। कई बार ये बीमारियां भयंकर रूप भी ले लेती हैं। ये लापरवाही और जागरूकता की कमी कई बीमारियों को जन्म देती है

जैसे स्तनों में दर्द होने पर लड़कियां इसे आम बीमारी समझ कर लापरवा‍ही बरतती है, लेकिन ये दर्द बढ़कर स्तन कैंसर का रूप भी ले सकता है। इसीलिए किसी भी तरह के बड़े खतरे को टालने के लिए जरूरी है डॉक्टर की सही समय पर सलाह लेना।
     बहुत से दम्पतियों मे समय से पहले शुक्राणुओं का बाहर आना एक आम समस्या है, जिसमें कि सेक्सुअल सेटिस्फेक्शन से पहले ही शुक्राणु शरीर के बाहर आ जाते हैं ा कभी कभी ये सम्बन्धों के शुरूवाती दिनों में डर या एक्साइटमेंट की वजह से होता है

    यह समस्या अकसर सेक्स के शुरूवाती दिनों में युवा लड़को में होती है या उन पुरूषांे में होती है जो अधिक उम्र के हो जाने के बाद सेक्स करते हैं ा यह कभी कभी किसी बीमारी या शारीरिक समस्या की वजह से भी होता है लेकिन इस समस्या पर थोड़ा सा विचार करके या डाक्टरी सलाह से इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है

    पर्फारमेन्स एनज़ाइटी भी एक बड़ा कारण हो सकता है ,जिससे बचने के लिए आप अपने पार्टनर से बात कर सकते है याद रखें सेक्स का एहसास पुरूष व स्त्री दोनों के लिए ही एक सा होता है, इन बातों को आराम से सोचें और समस्या का समाधान खुद ही निकल आयेगा

    प्रिमेच्योर इजेकुलेशन से बचने के तरीके:
    • खुद पर विश्वास रखें ऐसा सोचें कि यह सब जितना आपके लिए नया है उतना ही आपके पार्टनर के लिए भी है ा हो सके तो दोनों मिल कर इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करें ा अगर ज़्यादा परेशानी है तो आप डॉक्टरी सलाह भी ले सकते हैं 
    • जब आपको लगे कि अराउज़ल का लेवल बहुत ज़्यादा है तो लम्बी सांसे लें व छोड़ें और कुछ बहुत ही बोरिंग सोचें ा जब आपको लगे कि अराउज़ल का लेवल बहुत कम है तो भी न रूकें 
    • प्रिमेच्योर इजेकुलेशन से बचने के लिए रूकें और फिर प्रक्रीया शुरू करें ा इस प्रकार सेक्सुअल ऐक्ट का समय बढ़ता है
    • जब आपको लगे कि यह प्रक्रिया पूरी होने वाली है तो पेनिस को बाहर निकालें और कुछ देर आराम करें ,इस प्रकार बार बार सेक्स स्टिमुलेशन की प्रक्रीया को लम्बे समय तक करके,सेक्स ऐक्ट का समय बढ़ाया जा सकता है 
    • स्क्वीज़ मेथड से भी प्रिमेच्योर इजेकुलेशन से बचा जा सकता है। इस प्रक्रिया में पुरूष या स्त्री में से किसी एक को पेनिस के अन्तिम भाग को अंत के 10 से 20 सेकण्ड तक तेज़ी से रोके रखना चाहिए ा इस प्रक्रिया में भी लगातार इजेकुलेशन करना चाहिए ा रोकने व शुरू करने की प्रक्रीया को ही स्क्वीज़ मेथड कहते है 
    • प्रिमेच्योर इजेकुलेशन से बचने के लिए डिसेन्सिटाइजिंग क्रीम का प्रयोग करें ा इस क्रीम का प्रयोग टेस्टीस के अन्तिम भाग को डिसेन्सिटाइज़ करने के लिए किया जाता है ा मोटे कन्डोम भी सेन्सिटिविटी को कम करते हैं और सेक्सुअल ऐक्ट का समय बढ़ाते हैं
    • फोरप्ले से भी प्रिमेच्योर इजेकुलेशन की सम्भावना कम हो जाती है
    • सेक्स से पहले अपने पार्टनर को अराउज करें ा कोशिश करें जितना हो सके समय साथ में बितायें और एक दूसरे को मानसिक तौर पर खुश रखने की कोशिश करें
    • प्रिमेच्योर इजेकुलेशन से बचने के लिए मास्टर्बेशन
    • खुदसे ही तरह तरह के पोज़ अपनायें ा अपने एहसासों को जानें, इनसे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा ा
    • याद रखें प्रिमेच्योर इजेकुलेशन से बचने और अच्छे सेक्स में थोड़ा समय लगता है ,यहां वो प्रेक्टिस मेक्स ए मैन पर्फेक्ट स्लोगन बहुत ही सटीक बैठता है
    अगर इसके बाद भी आपको लगता है कि आपकी सेक्सुअल लाईफ ठीक नहीं है तो किसी सेक्स थेरेपिस्ट से सम्पर्क करें

    सहवास के बाद प्राइवेट पार्ट में रेडनेस

    सवाल: हमारी शादी को 5 साल हुए हैं। पहले कोई तकलीफ नहीं थी, लेकिन अब सहवास के बाद प्राइवेट पार्ट के अगले हिस्से में रेडनेस (लाली) आ जाती है और ठंडे दिनों में जैसे स्किन कट जाती है, वैसा ही हो जाता है। ऐसे में कुछ दिनों तक इच्छा होते हुए भी हम सहवास नहीं कर पाते। मेरी पत्नी को भी सफेद पानी आता था और उसका इलाज हुआ था। क्या करूं?
    - पाठक

    जवाब: आपको सहवास करने में कोई दिक्कत नहीं आती। सहवास के बाद जो रेडनेस आ जाती है और चीरे पड़ जाते हैं, उसकी ज्यादातर दो वजह हो सकती हैं। एक तो फंगल इंफेक्शन और दूसरा कभी-कभी डायबिटीज होने पर भी यह दिक्कत हो जाती है। 

    लेकिन आपकी दिक्कत की जड़ है आपकी पत्नी को सफेद पानी आना। ऐसा मुमकिन है कि सफेद पानी की रोकथाम के लिए अगर इलाज सही तरीके से न किया गया हो, तो सफेद पानी फिर आने लगता है। ऐसे में इलाज सिर्फ पत्नी का नहीं, पति का भी होना जरूरी है। इलाज के दौरान एक-दूसरे से एक-दूसरे को इंफेक्शन न हो, इसके लिए दोनों को पेनिट्रेटिव सेक्स से दूर रहना चाहिए। 

    इस फंगल इंफेक्शन को दूर करने के लिए कई तरह के ऐंटि-फंगल क्रीम मिलते हैं। इसे दिन में दो बार (एक बार नहाने के बाद और रात को सोते वक्त हल्के हाथ से) लगाएं। दो या तीन दिन में रेडनेस भी कम जाएगी और चीरे पड़ने की समस्या भी खत्म हो जाएगी।

    इसमें कई बार आयुर्वेदिक इलाज भी कारगर रहता है। बाजार में मिलने वाली कोकम घी भी अगर प्राइवेट पार्ट पर दिन में तीन से चार बार लगाएं, तो रेडनेस कम हो जाएगी और स्किन में चीरे नहीं पड़ेंगे।

    नोट: क्रीम का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करें।

    1 comment:

    1. Sir I am facing problem since 1.5 year and for my marriage is 4 year. My problem is two types
      1.sexual desire is less
      2.my penis has a problem with ED after insertion at the time of ejaculation my penis become soft . Kindly solve my problem
      I am frequently taking milk honey and kauch ke beech also but did not got anything
      My motality is 65 percentage and count is 90 milion.
      We are having no kids till now.
      My wife reports are also ok.

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